Archive for the ‘HINDI’ Category

हर दिन बदलती है मंजिले
हर पल बदलती है राहें
सोचता तो है बहुत कुछ मगर
नहीं होता जो इंसान चाहें
गुरवत के अक्सर दरमियान
बदल जाती है सबकी निगाहें
मत घबरा हरमन होगी रहमत
जब खोली खुदा ने अपनी बाहें
कलम : हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

 

 

 

एक शाम तेरी ज़िन्दगी से उधार चाहता हूँ
गर मिल सके तमाम उम्र का प्यार चाहता हूँ
मेरी ज़िन्दगी में आये बन के बहार चाहता हूँ
हर पल मिले जो दिल को करार चाहता हूँ
आये चेहरे पे ख़ुशी जिसके वो दीदार चाहता हूँ
हो बिन बादल मोहब्बत की बौछार चाहता हूँ
हर सांस पर हो जिसका इख्तिआर चाहता हूँ
जो करे हरमन पर भी जां निसार चाहता हूँ
कलम :- हरमन बजवा ( मुस्तापुरिया )
जाने अन्जाने में जो खता हो गयी
बस इतनी बात पे वो खफा हो गयी
लाख दफा कोशिश की उसे मनाने की
ना मानी तो हमारी इन्तेहाँ हो गयी
उन्हें इस बात का शायद हुआ गुमान
बिना उनके हमारी जिंदगी फना हो गयी
नहीं फर्क ऐसे सिरफिरों का हरमन को
फिर रही ढूँढती के गलती कहाँ हो गयी
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

जब आसमां में

Posted: 21/07/2012 in HINDI

जब आसमां में चमकते तारे थे
तब हम भी किसी के सहारे थे
वो लम्हे भी सबको प्यारे थे
जो मिल के संग में गुज़ारे थे
अचानक से तारा जो टूट गया
हर अपना हरमन से रूठ गया
दिन ढला और सूरज डूब गया
वक़्त हसीन वो पीछे छूट गया
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

 

 

 

बेरुखी से इतनी वो रुक्सत हुए
और हमें भी तन्हा छोड़ गए
खुद ही था रुलाया बे-तहाशा
खुद ही आंसू पोंछ गए
आप तो ना जाने वो सुखी थे
मेरे दुखो से मुह मोड़ गए
ना बाँध सका फिर से हरमन
धागा रिश्तो का ऐसा तोड़ गए
कलम:- हरमन बाजवा (मुस्तापुरिया )
इम्तिहानो के दौर से
गुज़रा हूँ इस कदर
हर मुश्किल घडी अब तो
आसान ही लगती है
हथियारों के दम पर
जंग नहीं जीती जाती
गर हो हौंसले बुलंद हरमन
दुनिया कदमो में झुकती है
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

सूरत उनकी को

Posted: 29/06/2012 in HINDI
सूरत उनकी को देख हर रोज
दिन की शुरुआत किया करते है
वो खफा है ना जाने किस बात पे
हर बार इनकार किया करते है
चाहत उनकी खुदा की इबादत जैसी
नाम हर सांस में हज़ार बार लिया करते है
अभी हुसन की चालाकियों से बेखबर है हरमन
प्यार बेशुमार कभी इल्जाम लगातार दिया करते है
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )
दिल-ऐ-नादान तुझे एहसास नहीं
उससे मिलने की भी कोई आस नहीं
तेरी हस्ती भी तो कोई खास नहीं
राहें इश्क की कदमो को रास नहीं
क्यूँ रूकती इश्क की ये बरसात नहीं
और बुझती तेरी ये प्यास नहीं
होती क्यूँ किसी मोड़ पे उससे मुलाकात नहीं
हालात दिल के समझती वो जज्बात नहीं
या तेरे इश्क में हरमन वो बात नहीं
के सीने उसके में दहकती जो आग नहीं
जुदाई से क्यूँ बाजवा मिलती तुझे निजात नहीं
सब छोड़ रस्मे तोड़ आती क्यूँ वो तेरे पास नहीं
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

कब तक

Posted: 25/06/2012 in HINDI
कब तक छुपाओगे चेहरे को
ढक कर यूँ नकाब से
यूँ तो है खुशबू हर फूल में
वो बात कहाँ जो गुलाब में
माना के हो बहुत ही हसीन
नहीं कम किसी आफताब से
यकीन करो ना लगेगी नज़र मेरी
देखूंगा तुम्हे इस हिसाब से
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )
उनकी परछाई को अपना बनाया
दिल की दीवारों पे नाम उनका लिखवाया
हर ख़ुशी से उनको रु-ब-रु करवाया
सब दुखो को अपने हिस्से डलवाया
चाहतो के समंदर को भर के दिखाया
उम्मीदों की लहरों को उफान पर उठाया
हर कदम पर उनके हमनें खुद को बिछाया
भर कांटे अपनी राहों में फूल उनकी में सजाया
फासलों को मिटाकर था आगे बढ़ के आया
गिले-शिकवो को भी उनके था हमनें भुलाया
सहे लाखो सितम हर हाल में “बाजवा” मुस्कुराया
बावजूद इसके बेरुखी से उसने “हरमन” को ठुकराया
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )