हर दिन बदलती है

Posted: 08/08/2012 in HINDI

हर दिन बदलती है मंजिले
हर पल बदलती है राहें
सोचता तो है बहुत कुछ मगर
नहीं होता जो इंसान चाहें
गुरवत के अक्सर दरमियान
बदल जाती है सबकी निगाहें
मत घबरा हरमन होगी रहमत
जब खोली खुदा ने अपनी बाहें
कलम : हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

 

 

 

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