ना ही कोई जमीन है
ना ही कोई जायदाद

ना ही मेरे सिर पर कोई
सजा हुआ है ताज

वक़्त बुरा है चल रहा
हर शेय को हूँ मोहताज

लाखो सवाल है लोगो के
नहीं मेरे पास कोई जवाब

सब्र का बाँध अभी टूटा नहीं
पर हालात तो है ख़राब

खुदा की रहमत पाने को
मैं कब से हूँ बेताब

कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

ਖੋਰੇ ਕਿਥੋ ਸਿਖਇਆ ਏ
ਤੂ ਪਿਠ ਤੇ ਵਾਰ ਕਰਨਾ

ਗੈਰਾ ਦੀ ਚੂਕ ਵਿੱਚ ਆ ਕੇ
ਤੂੰ ਹੱਦਾ ਪਾਰ ਕਰਨਾ

ਆਪਣਾ ਬਣਾ ਕੇ ਕੋਲ ਬੈਠਾ ਕੇ
ਗੱਲਾਂ ਹੋਰਾ ਦੀਆਂ ਕਰਨਾ

ਬੇ ਰੁਤ੍ਤੇ ਬੇ ਮੋਸਮ ਵਾਂਗੂ
ਬਦਲੀ ਬੰਨ ਕੇ ਵਰਨਾ

ਖੈਰ ਇਹ ਤਾ ਮੈਨੂ ਪਤਾ ਸੀ
ਅੱਸੀ ਤੇਰੇ ਹਾਥੋ ਹੈ ਮਰਨਾ

ਪਰ ਮਾਰਨ ਤੋ ਪਹਿਲਾ ਪੁਛ ਲੈਂਦੀ
ਖੋਰੇ ਲੋਕ ਵੀ ਗਵਾਹੀ ਦੇ ਦੇਂਦੇ

ਕਸੂਰ ਤਾ ਸਾਰਾ ਤੇਰਾ ਸੀ
ਅੱਸੀ ਫੇਰ ਵੀ ਸਫਾਈ ਦੇ ਦੇਂਦੇ

ਕਲਮ :- ਹਰਮਨ ਬਾਜਵਾ ( ਮੁਸਤਾਪੁਰਿਆ )

ਕੰਡਿਆ ਤੇ ਸੋਨਾ ਹੁੰਦਾ ਰੋਜ ਮੇਰਾ
ਹਿਜਰਾ ਦੀ ਅੱਗ ਵੀ ਸੇਕੀ ਦੀ ਏ

ਪੈਂਦਾ ਨੀ ਮੁੱਲ ਮੋਹਬੱਤਾਂ ਦਾ
ਬੇਵਫਾਈ ਵਾਲੀ ਗੱਲ ਵੀ ਵੇਖੀ ਦੀ ਏ

ਬਿਨਾ ਸੋਚੇ ਲਗਦੀਆਂ ਜਦੋ ਪ੍ਰੀਤਾ
ਰੋਜ ਹੁੰਦੀ ਲੜਾਈ ਵੀ ਵੇਖੀ ਦੀ ਏ

ਪਲ ਵਿੱਚ ਬੰਨ-ਦਾ ਪਲ ਵੀ ਟੇਹਨਾ
ਰੋਜ ਹੁੰਦੀ ਤਬਾਹੀ ਵੀ ਵੇਖੀ ਦੀ ਏ

ਲਾ ਕੇ ਯਾਰੀ ਬੇਕਦਰਾਂ ਨਾਲ
ਫੇਰ ਹੁੰਦੀ ਰੁਸਵਾਈ ਵੀ ਵੇਖੀ ਦੀ ਏ

ਜਦੋ ਲੱਗੀਆਂ ਤੋੜ ਜਾਂਦੇ ਨੇ ਲੋਕੀ
ਓਦ੍ਦੋ ਹੁੰਦੀ ਜ਼ਗ ਹਸਾਈ ਵੀ ਵੇਖੀ ਦੀ ਏ

ਕਲਮ :- ਹਰਮਨ ਬਾਜਵਾ ( ਮੁਸਤਾਪੁਰਿਆ )

राहे तकना तारे गिनना
सादिक काम हमारा है

उनके लिए तो होने वाला
रोजाना का एक मुजाहिरा है

हर शय गवाह है इस बात की
तेरा नाम ही हरमन ने पुकारा है

पर मेरी डूबती हुई कश्ती को
नहीं मिलने वाला कोई किनारा है

फिर भी बच गया हूँ जाने कैसे
मौला तेरा ही तो सहारा है

वर्ना उस ज़ालिम ने तो मुझे
तडपा तडपा के मारा है

कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

ਸੱਜਣਾ ਦੀ ਬੇਵਫਾਈ ਨੇ
ਸਾਨੂ ਜੇਉਣਦੀਆ ਹੀ ਮਾਰ ਦਿੱਤਾ

ਪਹਿਲਾ ਹੀ ਚਰਚੇ ਬਥੇਰੇ ਸੀ
ਏਕ ਹੋਰ ਨਵਾ ਚੰਨ ਚਾੜ ਦਿੱਤਾ

ਤੇਰੀ ਯਾਰੀ ਦਾ ਸਿਲਾ ਫੇਰ
ਹਰ ਗਾਲੀ ਵਿਚ ਆਮ ਹੋ ਗਿਆ

ਐਸਾ ਮੁੱਲ ਮੋੜਿਆ ਸਾਡੇ ਪਿਆਰ ਦਾ ਕਿ
ਰੱਜ ਕੇ ਬਾਜਵਾ ਬਦਨਾਮ ਹੋ ਗਿਆ

ਕਲਮ :- ਹਰਮਨ ਬਾਜਵਾ ( ਮੁਸ੍ਤਾਪੁਰਿਆ )

जहान से रुक्सत होने की जो रिवायत है
वो ही खुदा की सबसे बड़ी नियामत है
यूँ तो हाज़ारो ढंग है जीने के हरमन
पर विदाई की सिर्फ एक ही कवायद है
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )
साजिश है चाँद लोगो की
मुझे नीचा दिखने की
तमाम उम्र की मेहनत को
धोखा बता के मिटने की
मेरी बनी बनाई हस्ती को
ऊपर से निचे गिराने की
कुछ की है दुआए साथ में
कुछ बद्द-दुआए भी है
कुछ खड़े है हक़ में मेरे
और बहुत मेरे खिलाफ भी है
ना जाने कितनो को दगा दिया है
ना किया किसी से इन्साफ भी है
बहुतों ने किया है तंग मुझे
मेरी गलती का मुझे एहसास भी है
कहते है ये सब लोग मुझे
के इरादे मेरे नापाक भी है
फिर भी खुदा की रहमत का
शायद होना अभी एहसास भी है
मेरी सजा ना जाने कैसी होगी
बाकी मिलना खुदा का अभी जवाब भी है
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )
तबीयत से हूँ नासाज और मन भी है उदास
किस्मत को लेकर आजकल हूँ थोडा सा नाराज
क्यूँ मिलता नहीं जो चाहता हूँ मैं
खुदा की रजा के भी हूँ मैं खिलाफ
कोशिशे भी करता हूँ बेहिसाब
मेरा दामन भी है बिल्कुल साफ़
फिर सोचता हूँ क्या अकेला हूँ मैं
जिसके साथ नहीं हुआ इन्साफ
शिकायते भी रोज ही करता हूँ
उसके हर सवाल का भी है जवाब
इबादतें भी रोज ही करता हूँ
हर हाल मैं रखता हूँ उसको याद
हर कण कण में तू कहते है बसता
फिर क्यूँ फिरता है हरमन बदहवास
गर उसकी रजा में ही क़ज़ा है तो
कब पूरे होंगे ये मेरे सब खवाब
कलम : हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )
गुजर रह हूँ नाजुक हालातो से
और वक़्त भी साथ नहीं दे रहा

टूटा हूँ जैसे आसमान से तारा
जो किसी को दिखाई नहीं दे रहा

बन गया हूँ खिलोने के जैसा
होर कोई मुझसे है खेल रहा

सब चले गए है साथ छोड़कर
मैं फिर भी सब कुछ झेल रहा

माना के ऐसा भी होता है अक्सर
जैसे खुद को कोई बेच रहा

खुशियाँ तो बीती हँस हँस के
अब दुःख भी दस्तक है दे रहा

होगा ना मुनासिब अब सोच के ये
क्यों पीछे मुड़ मुड़ के मैं देख रहा

जब होगी छाओं तब मिल ही जाएगी
फिलहाल तो धूप मैं सेक रहा

कलम : हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

आसमां में तारे है बेशुमार
हमें भी तुमसें है उतना प्यार

दिल की धड़कन से पूछो जरा
हर वक़्त जो रहती है बेक़रार

जर्रा जर्रा रोम रोम में तुम ही हो समाए
चाहते तो है बहुत तुम्हे पर इज़हार न कर पाए

कैसे कहे कुछ न सूझे कैसे तुम्हे बताए
देख तुम्हारी अदाए ज़ालिम दिल को रखते है समझाए

काश के ऐसा हो तुम आँखों की भाषा समझ सको
वर्ना खामोशी में हमारी ज़िन्दगी ना गुज़र जाए

कलम : हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )