Archive for the ‘HINDI’ Category
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निभाना नहीं चाहती थी मेरे साथ वो
भरोसा नहीं था उसको मेरे प्यार पर शायद
देखा था मैंने अक्सर उसको निगाहे चुराते हुए
कर दिया था मैंने तो नाम उसके अपना सब कुछ
दीए भी बुझा देता हूँ
रोशिनी को भी मिटा देता हूँ
लगता है डर उजालो से
परदे भी गिरा देता हूँ
अंधेरो के साए में
अक्सर वक़्त बिता देता हूँ
इस कदर से मिले है धोखे मुझको
परछाइयों को भी दूर भगा देता हूँ
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )
शम्मा ने कहा परवाने से
हुसन ने कहा दीवाने से
आखिर क्या बात है ऐसी मुझ में
जो रुक्सत हुए तुम ज़माने से
शम्मा से कहा परवाने ने
हुसन से कहा दीवाने ने
तेरी चाहत मैं है मज़ा इतना
ज़िन्दगी भी थोड़ी है संग बिताने में ..
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )
तेरे नजदीक आना चाहता हूँ
में खुद से दूर जाना चाहता हूँ
तुझे बाँहों में समाना चाहता हूँ
सारा जहाँ पाना चाहता हूँ
हवा भी ना गुजरे होकर दरमियाँ से
इस कदर से दूरियां मिटाना चाहता हूँ