ज़िन्दगी एक मेला है :-

Posted: 15/07/2013 in HINDI

जब मेला लगता है तो लोग देखने आते है।
उसी तरह से इंसान धरती पर पैदा होता है

मेले में लोग आते है और खूब मौज मस्ती करते हैं।
वैसे बचपन ज़िन्दगी का सबसे हसीं और प्यारा हिस्सा है जब इंसान बेफिक्र होकर खूब मौज मस्ती करता है ।

मेले में आने के बाद कभी मन में ख्याल आता है के खर्चा ज्यादा हो जायेगा और हाथ तंग ।
जैसे जैसे इंसान बड़ा होता जाता है उसकी जिम्मेवारिया बढती जाती है और ऐश कम ।

मेले में हर शेय बिकती है । बस कीमत सही होनी चाहिए । फिर तो बेचने वाला भी बेच ही देता है और खरीदने वाला भी खरीद ही लेता है ।
ज़िन्दगी की इस भाग दौड़ मैं भी :-

जिस्म बिकता है
ईमान बिकता है
और इंसान भी बिकता है
हालात बिकते हैं
और ज़ज्बात भी बिकते है

मेले में कुछ लोग सामान महंगा बेचते है और कुछ सस्ता । कुछ लोगो का नफा होता है और कुछ लोगो का नुक्सान होता है ।

उसी तरह कुछ की मुसीबते और परेशानियाँ ज्यादा है और कुछ की कम । कुछ हिम्मत करके सामना करते है और मुसीबतों से छुटकारा पा लेते है और कुछ लोग हिम्मत हार कर बैठ जाते है और सब कुछ गवां लेते हैं ।

मेले में बिकने वाले सामान की पहचान करनी मुश्किल होती है कि वो असली है या नकली।
ठीक उसी तरह से ज़िन्दगी में भी इंसान को पहचान पाना बहुत ही मुश्किल होता है। ना जाने कब कौन क्या बन जाये।

कुछ ऊँची ऊँची आवाजे लगाकर ज्यादा सामन बेचने की कोशिश करते हैं जब्कि कुछ का सामान ऐसे ही बिक जाता है ।
उसी तरह से जिन लोगो मैं क़ाबलियत नहीं होती वो दिखावा ज्यादा करते है और जो लोग काबिल होती है उन्हें अपने आप को दिखाने की जरूरत नहीं होती ।

जब मेले मैं कोई चीज़ पसंद आ जाये तो उसकी कीमत नहीं देखी जाती ।
वैसे ही अच्छे और सच्चे लोग बेशकीमती होते है।
ज़माना उनके पीछे फिरता है ना की वो ज़माने के ।

कुछ झूठ बोलकर सामान बेच देते है और जब बाद में ये पता लगता है के ये घटिया सामान है तो वो उस बेचने वाले के पास दोबारा नहीं जाते।
वैसे ही बुरे लोगो को कोई पसंद नहीं करता और उनकी बुराई ही होती है ।

कई बार मनपसंद चीज़ ना मिलने पर हम उसकी जगह कोई और चीज़ खरीद लेते है।
वैसे ही ज़िन्दगी में कई बार हालात ऐसे होते है के हमें फैसला बदलना पड़ता है और समझौते करने पड़ते हैं ।

कभी कभी हम पसंदीदा चीज़ पाकर भी खुश नहीं होते।
उसी तरह ज़िन्दगी मैं हर किसी को सब कुछ नहीं मिलता। हर कोई अधूरा है।

धीरे धीरे लोग मेले से वापिस लौटने लगते है।
इंसान की उम्र भी बढती जाती है।

फिर एक वक़्त आता है जब मेल उजाड़ जाता है और उस जगह की यादें ही बाकी रह जाती है।
इंसान भी अपनी ज़िन्दगी के आखरी पड़ाव मै पहुच जाता है और एक दिन इस दुनिया को अलविदा कह जाता है। बस उसकी यादें ही बाकी रह जाती हैं ।

फिर से अगले साल या कुछ साल बाद उसी जगह मेला दोबारा लगता है।
कहीं ना कहीं नयी ज़िन्दगी इस धरती पर जन्म लेती है।

Comments
  1. Rajeev's avatar Rajeev says:

    Great Harman bajwa Saab good on you mate

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