कल रात को मैंने सोचा

Posted: 11/11/2012 in HINDI
कल रात को मैंने सोचा ये
क्यूँ ख्वाबो की मेरे ताबीर नहीं
जो दिखता है सब वो सच तो नहीं
फिर क्यूँ ये मुझे मंजूर नहीं
पाना चाहो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं
सब आसान है मंजिल दूर नहीं
क्यूँ रहता है कोसता खुदा को हर वक़्त
लकीर हाथ की है जो वो तकदीर तो नहीं
बना सकता है खुद मिटा सकता है खुद
कोई शहंशाह नहीं कोई फ़कीर नहीं
दिया सब कुछ है खुदा ने इंसान को मगर
क्यूँ दिखती उसे ” हरमन “असली तस्वीर नहीं
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

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