जो बनना चाहा था……

Posted: 14/12/2011 in HINDI
जो बनना चाहा था
वो ना कभी बन सका
और जो ना सोचा था कभी
वो आख़िरकार मैं बन गया
पर आज जो मैं बना हूँ
अपनों की मेहरबानी है
और जो कमी रह गए कहीं
अपनों की ही वो शैतानी है
खैर चलो जो भी हुआ
अब ज़िन्दगी यूँ ही बितानी है
खुद की तो बस्ती उजड़ गयी
पर औरो की मुझे बसानी है.
लेखक :– हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

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