हमें देखकर लोग ……….

Posted: 08/12/2011 in HINDI
हमें देखकर लोग न जाने
क्या सबक लेते है
शायद ग़लतफहमी में
मुझे गलत समझ लेते है
पूछते नहीं आकर के
आखिर सच्चाई क्या है
मेरी ख़ामोशी को वो शायद
मेरी रजा जान लेते है
कसूर उनका भी नहीं है
यह मैं भी जनता हूँ
बदल मायूसी के हर वक़्त जो
मेरे चेहरे पे छाये रहते है
कलम : हरमन बजवा ( मुस्तापुरिया )

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