Posted: 18/11/2018 in Uncategorized

Posted: 18/11/2018 in HINDI

Posted: 16/11/2017 in HINDI

Chorna bhi nahi chahta
Aur paas bhi nahi rehta


Chup hai lazmi baato ko lekar
Be matlab ki baato ko hai kehta


Na jane kya chupa hai uske dil main
Harman dariya aansooa ka roj hai behta


Usse matlab hai sirf apni khushi se
Bajwa na jane kitne dukh has ke hai sehta

​Tere bajo sun ve sajjna.                             Sada Jag vich hor na koi

Tainu chad ke sajjna ve.                           Meri akh na kise nu royi

Tu hi dil di dhadkan meri.                           Tu hi saha vich vasda ae

Tu chehre te bulla utte.                           Mere ban ke khushi hasda ae

Tera vichoda ek pal da vi.                         Jind kamli na sahar di ae

Ki laina main Jag to sajjna.                   Mainu bhukh Jo Tere pyar di ae

Ishq Tere vich baldi nu Harman.               Var ke meh vangu tu thaar de

Bajwa kar tu mohabbat aisi jo.               Meri tadapdi rooh nu karaar de

Meri tadapdi rooh nu karaar de! 

काश के ऐसा होता खुदा
वो मेरे साथ होती

सब खुशियाँ मुझको मिल जाती
और हसीं कायनात होती

हर पल उसके साथ रहता
ना कभी जुदा करता

तारे भी तोड़ के ले आता
हर मांग पूरी करता

हर ख्वाब उसका सजाता मैं
ना दुःख उसको कोई देता

सब खुशिया उसको दे के मैं
हर गम खुद ही ले लेता

एक बार तो हाँ कर देती
मेरे प्यार को समझ पाती

शायद कमी थी तुझमें हरमन
दुआएं इतनी बेकार ना जाती

कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

मैं फिरा हूँ इश्क की गलियों में
तन्हाई के सिवा कुछ नहीं मिला

लाख ठोकरें खाई हैं मैंने यहाँ
मुझे फिर भी उनसे नहीं कोई गिला

ढूँढा बहुत मैंने इश्क को
सही पता पर उसका नहीं मिला

बरसो तक सींचा मैंने पर
बूटा प्यार का फिर भी नहीं खिला

कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

जब मेला लगता है तो लोग देखने आते है।
उसी तरह से इंसान धरती पर पैदा होता है

मेले में लोग आते है और खूब मौज मस्ती करते हैं।
वैसे बचपन ज़िन्दगी का सबसे हसीं और प्यारा हिस्सा है जब इंसान बेफिक्र होकर खूब मौज मस्ती करता है ।

मेले में आने के बाद कभी मन में ख्याल आता है के खर्चा ज्यादा हो जायेगा और हाथ तंग ।
जैसे जैसे इंसान बड़ा होता जाता है उसकी जिम्मेवारिया बढती जाती है और ऐश कम ।

मेले में हर शेय बिकती है । बस कीमत सही होनी चाहिए । फिर तो बेचने वाला भी बेच ही देता है और खरीदने वाला भी खरीद ही लेता है ।
ज़िन्दगी की इस भाग दौड़ मैं भी :-

जिस्म बिकता है
ईमान बिकता है
और इंसान भी बिकता है
हालात बिकते हैं
और ज़ज्बात भी बिकते है

मेले में कुछ लोग सामान महंगा बेचते है और कुछ सस्ता । कुछ लोगो का नफा होता है और कुछ लोगो का नुक्सान होता है ।

उसी तरह कुछ की मुसीबते और परेशानियाँ ज्यादा है और कुछ की कम । कुछ हिम्मत करके सामना करते है और मुसीबतों से छुटकारा पा लेते है और कुछ लोग हिम्मत हार कर बैठ जाते है और सब कुछ गवां लेते हैं ।

मेले में बिकने वाले सामान की पहचान करनी मुश्किल होती है कि वो असली है या नकली।
ठीक उसी तरह से ज़िन्दगी में भी इंसान को पहचान पाना बहुत ही मुश्किल होता है। ना जाने कब कौन क्या बन जाये।

कुछ ऊँची ऊँची आवाजे लगाकर ज्यादा सामन बेचने की कोशिश करते हैं जब्कि कुछ का सामान ऐसे ही बिक जाता है ।
उसी तरह से जिन लोगो मैं क़ाबलियत नहीं होती वो दिखावा ज्यादा करते है और जो लोग काबिल होती है उन्हें अपने आप को दिखाने की जरूरत नहीं होती ।

जब मेले मैं कोई चीज़ पसंद आ जाये तो उसकी कीमत नहीं देखी जाती ।
वैसे ही अच्छे और सच्चे लोग बेशकीमती होते है।
ज़माना उनके पीछे फिरता है ना की वो ज़माने के ।

कुछ झूठ बोलकर सामान बेच देते है और जब बाद में ये पता लगता है के ये घटिया सामान है तो वो उस बेचने वाले के पास दोबारा नहीं जाते।
वैसे ही बुरे लोगो को कोई पसंद नहीं करता और उनकी बुराई ही होती है ।

कई बार मनपसंद चीज़ ना मिलने पर हम उसकी जगह कोई और चीज़ खरीद लेते है।
वैसे ही ज़िन्दगी में कई बार हालात ऐसे होते है के हमें फैसला बदलना पड़ता है और समझौते करने पड़ते हैं ।

कभी कभी हम पसंदीदा चीज़ पाकर भी खुश नहीं होते।
उसी तरह ज़िन्दगी मैं हर किसी को सब कुछ नहीं मिलता। हर कोई अधूरा है।

धीरे धीरे लोग मेले से वापिस लौटने लगते है।
इंसान की उम्र भी बढती जाती है।

फिर एक वक़्त आता है जब मेल उजाड़ जाता है और उस जगह की यादें ही बाकी रह जाती है।
इंसान भी अपनी ज़िन्दगी के आखरी पड़ाव मै पहुच जाता है और एक दिन इस दुनिया को अलविदा कह जाता है। बस उसकी यादें ही बाकी रह जाती हैं ।

फिर से अगले साल या कुछ साल बाद उसी जगह मेला दोबारा लगता है।
कहीं ना कहीं नयी ज़िन्दगी इस धरती पर जन्म लेती है।

तेरी चाहत में मज़ा है इतना
मैं सारी ज़िन्दगी अपनी गुज़ार दूँ

तूँ मेरी बन के रहना बस
इतना मैं तुझे प्यार दूँ

कदम पड़ने से पहले ज़मीन पर
राहो में फूलो को खिलार दूँ

तेरे हर गम को बना के अपना
मैं सुख सारे अपने बिसार दूँ

कभी देख ना पाए पतझड़ तूँ
तेरी ज़िन्दगी को सदा बहार दूँ

तेरे हर शौंक को करू पूरा
तेरे ख्वाबो को भी सँवार दूँ

ग़लतफ़हमियाँ ना हो दरमियाँ “बाजवा”
हर गलती को मैं अपनी सुधार दूँ

रहे हर वक़्त आँखों के सामने वो “हरमन”
तुझ पर हस के मैं जां भी निसार दूँ

कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

हुस्न वालो की अदाए होती है कातिल
जान आशिक कहाँ अपनी बचा पाता है

ये करते है ऐश इन्ही के दम पर
सादिक अपना सब कुछ लुटा जाता है

बिखेरते है जब वो अपनी ज़ुल्फो को
घटाओ को भी पसीना आ जाता है

मस्त नजरो का तीर जब चलता है
हर कोई निशाने पर आ जाता है

देख कर हरकतें इन जालिमो की
ईमान कसम से डगमगा जाता है

महफ़िल में हो या फिर और कही
जिक्र लबो पर उनका आ जाता है

दिल के खोटो का यही पेशा है हरमन
हुस्न जलवे अपने दिखा जाता है

खुदा डाले और मुसीबतों में बेशक बाजवा
हुस्न वालो के नाम से खौफ छा जाता है

कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

वो वक़्त क्या हसीं था
जब तू मेरा जानशीं था

आज वक़्त का जोर है
तेरे साथ कोई और है

दिल की सुनसान गलियों में
कैसा हरमन मचा ये शोर है

जिधर भी देखू नजरे उठा कर
सिवा तेरे ना चेहरा कोई और है

कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )