BajwaMustapuria
कर्मो का किया भुगत रहा हूँदुखों का बोझ उठा रहा हूँदर्दो वाली रख कंधे गठ्ठड़ीनंगे पैर चलता जा रहा हूँअपना कोई भी साथ नही हैअकेला ही भार उठा रहा हूँजैसा किया वैसा भुगतना पड़ताइसी सच को माथे लगा रहा हूँ