हुस्न वालो की अदाए होती है कातिल
जान आशिक कहाँ अपनी बचा पाता है
ये करते है ऐश इन्ही के दम पर
सादिक अपना सब कुछ लुटा जाता है
बिखेरते है जब वो अपनी ज़ुल्फो को
घटाओ को भी पसीना आ जाता है
मस्त नजरो का तीर जब चलता है
हर कोई निशाने पर आ जाता है
देख कर हरकतें इन जालिमो की
ईमान कसम से डगमगा जाता है
महफ़िल में हो या फिर और कही
जिक्र लबो पर उनका आ जाता है
दिल के खोटो का यही पेशा है हरमन
हुस्न जलवे अपने दिखा जाता है
खुदा डाले और मुसीबतों में बेशक बाजवा
हुस्न वालो के नाम से खौफ छा जाता है
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )