वो वक़्त क्या हसीं था
जब तू मेरा जानशीं था
आज वक़्त का जोर है
तेरे साथ कोई और है
दिल की सुनसान गलियों में
कैसा हरमन मचा ये शोर है
जिधर भी देखू नजरे उठा कर
सिवा तेरे ना चेहरा कोई और है
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )
आज वक़्त का जोर है
तेरे साथ कोई और है
दिल की सुनसान गलियों में
कैसा हरमन मचा ये शोर है
जिधर भी देखू नजरे उठा कर
सिवा तेरे ना चेहरा कोई और है
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )