वो वक़्त क्या हसीं था…

Posted: 15/07/2013 in HINDI
वो वक़्त क्या हसीं था
जब तू मेरा जानशीं था

आज वक़्त का जोर है
तेरे साथ कोई और है

दिल की सुनसान गलियों में
कैसा हरमन मचा ये शोर है

जिधर भी देखू नजरे उठा कर
सिवा तेरे ना चेहरा कोई और है

कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

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