मैं फिरा हूँ इश्क की गलियों में…

Posted: 15/07/2013 in HINDI
मैं फिरा हूँ इश्क की गलियों में
तन्हाई के सिवा कुछ नहीं मिला

लाख ठोकरें खाई हैं मैंने यहाँ
मुझे फिर भी उनसे नहीं कोई गिला

ढूँढा बहुत मैंने इश्क को
सही पता पर उसका नहीं मिला

बरसो तक सींचा मैंने पर
बूटा प्यार का फिर भी नहीं खिला

कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

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