तेरी चाहत में मज़ा है इतना
मैं सारी ज़िन्दगी अपनी गुज़ार दूँ
तूँ मेरी बन के रहना बस
इतना मैं तुझे प्यार दूँ
कदम पड़ने से पहले ज़मीन पर
राहो में फूलो को खिलार दूँ
तेरे हर गम को बना के अपना
मैं सुख सारे अपने बिसार दूँ
कभी देख ना पाए पतझड़ तूँ
तेरी ज़िन्दगी को सदा बहार दूँ
तेरे हर शौंक को करू पूरा
तेरे ख्वाबो को भी सँवार दूँ
ग़लतफ़हमियाँ ना हो दरमियाँ “बाजवा”
हर गलती को मैं अपनी सुधार दूँ
रहे हर वक़्त आँखों के सामने वो “हरमन”
तुझ पर हस के मैं जां भी निसार दूँ
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )