तेरी चाहत का …

Posted: 04/07/2013 in HINDI
तेरी चाहत का असर अभी होना बाकी है
मर्ज-ऐ-इश्क के दर्द में रोना बाकी है
सूखी पलकों को अभी और भिगोना बाकी है
जहाँ से ना लौट पाए,राहो मैं खोना बाकी है
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

Leave a comment