ये जो ख़ामोशी है…

Posted: 02/05/2013 in HINDI
ये जो ख़ामोशी है
खुद तो चुप रहती है
समझने वाला समझे तो
बिना बोले सब कुछ कहती है
दिल में दबी हो बात जो
चेहरे के राही कहती है
सहती है कितना कुछ देखो
अन्जान बनी फिर भी रहती है
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

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