ऊँचा बैठ सदा नीच देखिए
और ना ऊँचा होए
“हरमन” ऊँचा हाथ ना पहुचे
नीच सदा सुखी होए
ऊँचा उठ ना भूलिए सब कुछ
पल में हस्ती खोए
ऊँचा उड़े परिंदा हर पल
धरती पे आसरा होए
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )