लोगो ने सिखा दिया
चालाकी करना मुझे
वर्ना अपने भोलेपन से
हरमन अभी तक अन्जान था
ना जाने कहाँ से हुआ
मुश्किलों का आगाज
खुदा कसम अब से पहले
बड़ा ही इत्मीनान था
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )