आग लगी थी

Posted: 04/09/2012 in HINDI

आग लगी थी चारो तरफ
सब कुछ जल रहा था
मेरा लुट गया था सब कुछ
उसका दिल ना पिघल रहा था
क्या देख कर ना जाने वाहा
उसका चेहरा खिल रहा था
मेरी साँसे थम रही थी
उसको सुकून मिल रहा था
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

 

 

 

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