नहीं देखती थी जो कभी
नजरे उठा कर मेरी तरफ
मिजाज उसके अब मुझे
बदले बदले से लगते है
लगता है के फैसला
कर लिया है उसने शायद
इसीलिए हम भी दिल को
समझा कर ही रखते है
कलम : हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )