जब आसमां में चमकते तारे थे
तब हम भी किसी के सहारे थे
वो लम्हे भी सबको प्यारे थे
जो मिल के संग में गुज़ारे थे
अचानक से तारा जो टूट गया
हर अपना हरमन से रूठ गया
दिन ढला और सूरज डूब गया
वक़्त हसीन वो पीछे छूट गया
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )