मैं शिद्दत्त से …

Posted: 09/05/2012 in HINDI
मैं शिद्दत्त से जिनके लिए लिखता रहा
कभी गौर से उन्होंने पढ़ा ही नहीं

वो समझे हर बार कलम नयी ही थी
मैंने मुद्दत्त से श्याही को भरा ही नहीं

जैसे पेड़ पर लगे हो फल बेशुमार
किसी शक्श के हाथो कोई लगा ही नहीं

बाजवा अभी तो लिखना सिखा ही है
इल्म शायरी का तभी तो चढ़ा ही नहीं

कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

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