जलते हुए को …

Posted: 23/04/2012 in HINDI
जलते हुए को देख कर
भी ना उनसे रहा गया
के पास आये मेरे और
हाथ सेक कर चल दिए
उम्मीद तो थी शायद
के मुझे बचा लेंगे
पर उन्हें कोई फर्क ना था
के कौन जल रहा था
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

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