सपने में देखा…

Posted: 19/04/2012 in HINDI
सपने में देखा तो लोग ईमान बदल रहे थे
नकली अपनी शख्शियत की पहचान बदल रहे थे
सबका बने विश्वास वो जुबान बदल रहे थे
जो सचाई के थे साथ वो पैगाम बदल रहे थे
कुछ ऐसे भी थे लोग वहां जो अरमान बदल रहे थे
ज़माने से जो खड़े थे पैरो के निशान बदल रहे थे
सब देख रह था “हरमन” पर कुछ भी न कर पाया
क्यूँ की जिनको थी उम्मीद उनके अंजाम बदल रहे थे
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )
Comments
  1. mOHD aRSHIL's avatar mOHD aRSHIL says:

    SAHI HAI…..BOHOT BADHIYA KAHI AAPNE….

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