चिराग तो जल रहे थे …

Posted: 08/04/2012 in HINDI
चिराग तो जल रहे थे
मगर रोशिनी कहाँ थी
साँसे तो चल रही थी
मगर ज़िन्दगी कहाँ थी
आँखें तो बंद थी
मगर नींद कहाँ थी
धड़कन भी थी चल रही
मगर आवाज कहाँ थी
मंजिल तो थी सामने
रस्ते पर नज़र कहाँ थी
जिसके लिए खुद को भुला दिया
उसको खबर ही कहाँ थी
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

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