ज़िन्दगी हर पल इम्तिहान…

Posted: 30/03/2012 in HINDI
ज़िन्दगी हर पल इम्तिहान लेती है
सब कोशिशे नाकाम दिखाई देती है
मुसीबतें हर तरफ से घेर लेती है
वक़्त की घड़ियाँ तन्हाई को अंजाम देती है
मैं भी आज बिल्कुल टूट सा गया हूँ
खुद को इतना अकेला क्यूँ पा रहा हूँ
कल तक तो था चिराग रोशन मगर
ढलते सूरज की तरह डूबता क्यूँ जा रहा हूँ
कुछ हालात और वक़्त की पड़ी मार ऐसी
के अब मैं इसे और न झेल पा रहा हूँ
कहते है वक़्त भर देता है हर जखम को
फिर टूटे कांच की तरह बिखरता क्यूँ जा रहा हूँ
शायद किस्मत मैं लिखा था कुछ ऐसा होना
के मुझे पड़ेगा अब तमाम उम्र ही रोना
कोई दिख नहीं रहा अपना के दर्द बाँट लूँ
उजड़ा आशियाना छोड़कर ढून्ढ रहा हूँ अब कोई कोना
सीख लेता है इंसान खुद ही की गलतियों से
ना जाने हर बार “हरमन” फैसला गलत क्यूँ लेता है
ज़िन्दगी भर करता है रहता हालातो से समझोता
जिसको पाने के लिए दौड़ता है उसे ही खो देता है
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

Leave a comment