ज़ख़्म भी हमें…

Posted: 24/03/2012 in HINDI
ज़ख़्म भी हमें बार बार मिले
गिले शिकवे भी उनके हज़ार मिले
हमनें बांटी खुशियाँ हर पल
पर उनसे शिकायतों के हार मिले
हम रहे बुलाते दो पल साथ बैठने को
वो रात भर किसी और के साथ बहार मिले
वक़्त रहते पता चला के वो ही बेवफा है
फिर लोगो को हम ही क्यूँ गुन्हेगार मिले
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

Leave a comment