कल रात को मैंने सोचा ये…

Posted: 04/03/2012 in HINDI
कल रात को मैंने सोचा ये
क्यूँ ख्वाबो की मेरे ताबीर नहीं
जो असलियत है वो तो सच ही है
फिर क्यूँ ये मुझे मंजूर नहीं
पाना चाहो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं
सब आसान है मंजिल दूर नहीं
क्यूँ रहता है कोसता खुदा को हर वक़्त
खिंची लकीर है जो वो तेरी तकदीर नहीं
बना सकता है खुद मिटा सकता है खुद
कोई शहनशाह नहीं कोई फ़कीर नहीं
दिया सब कुछ है खुदा ने इंसान को मगर
फिर क्यूँ दिखती उसे असली तस्वीर नहीं
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

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