ना ही कोई जमीन है…

Posted: 05/02/2012 in HINDI
ना ही कोई जमीन है
ना ही कोई जायदाद

ना ही मेरे सिर पर कोई
सजा हुआ है ताज

वक़्त बुरा है चल रहा
हर शेय को हूँ मोहताज

लाखो सवाल है लोगो के
नहीं मेरे पास कोई जवाब

सब्र का बाँध अभी टूटा नहीं
पर हालात तो है ख़राब

खुदा की रहमत पाने को
मैं कब से हूँ बेताब

कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

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