आज फिर मैं वही खड़ा हूँ
जहाँ से हुई थी शुरुआत
ना ही मैं बदला हूँ
और ना ही बदले है हालात
लोग भी वही पुराने है
और पुरानी उनकी बात
पर कोई मुझे समझता नहीं
मेरे दिल में क्या है बात
दर्द बाटना चाहत हूँ
खोलना चाहता हूँ कुछ राज
कान भी तरसते है सुनने को
कोई आ के दे आवाज
पर हालातो से समझोता करता हूँ
हर रोज इक नयी जंग लड़ता हूँ
दुःख तकलीफों का सामना करता हूँ
पर थोडा सा मैं भी डरता हूँ
ना जाने कैसे मैं मुश्किलें जरता हूँ
हर पल जीने की कोशिश में मरता हूँ
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )