गुजर रह हूँ नाजुक हालातो से…

Posted: 20/01/2012 in HINDI
गुजर रह हूँ नाजुक हालातो से
और वक़्त भी साथ नहीं दे रहा

टूटा हूँ जैसे आसमान से तारा
जो किसी को दिखाई नहीं दे रहा

बन गया हूँ खिलोने के जैसा
होर कोई मुझसे है खेल रहा

सब चले गए है साथ छोड़कर
मैं फिर भी सब कुछ झेल रहा

माना के ऐसा भी होता है अक्सर
जैसे खुद को कोई बेच रहा

खुशियाँ तो बीती हँस हँस के
अब दुःख भी दस्तक है दे रहा

होगा ना मुनासिब अब सोच के ये
क्यों पीछे मुड़ मुड़ के मैं देख रहा

जब होगी छाओं तब मिल ही जाएगी
फिलहाल तो धूप मैं सेक रहा

कलम : हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

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