ना था एहसास दर्द का तुझको….

Posted: 02/01/2012 in HINDI
ना था एहसास दर्द का तुझको
इसी लिए तू सितम करती रही

नजरे छुपा कर बातें करना
औरो से छुप छुप के मिलती रही

वादे करना और फिर उन्हें तोड़ देना
तुने आदत कुछ ऐसी बनाई

कुछ भी ना रहा मेरे पास ऐ ज़ालिम
बची तो सिर्फ तेरी याद और मेरी ये तन्हाई

अब तू ही बता क्या नाम दूँ इसे
तेरी रुसवाई या फिर बेवफाई

कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

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