दवा दारू से ना काम चलेगा
मेरा मर्ज बहुत ही गहरा है
सब हकीमो ने भी दे दिया जवाब
जब से उसने फेरा चेहरा है
जा कर कह दो उस जालिम से
के उसकी याद का ही पहरा है
नहीं निकलेगा दम तब तक
जब तक वो मिलने ना आई
के उसकी हसरतो के शौंक पर ही तो
तमाम उम्र है मैंने अपनी गवाई
कलम:- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )