इक ख्वाब देखा ….

Posted: 02/01/2012 in HINDI
इक ख्वाब देखा कल रात मैंने
जिसे पूरा करने की ख्वाहिश है

अभी तो इज़हार ऐ इश्क हुआ है
बाकी होनी आजमाईश है

तू हो कर रहना मेरी बस
ये ही तुझ से मेरी गुज़ारिश है

आकर सिमट जा मेरी बाँहों में
के वक़्त की भी ये फरमाईश है

कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

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