दीए भी बुझा देता हूँ…

Posted: 24/12/2011 in HINDI
दीए भी बुझा देता हूँ
रोशिनी को भी मिटा देता हूँ
 लगता है डर उजालो से
परदे भी गिरा देता हूँ
अंधेरो के साए में
अक्सर वक़्त बिता देता हूँ
 इस कदर से मिले है धोखे मुझको
परछाइयों को भी दूर भगा देता हूँ
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

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