कुछ तो कह कर….

Posted: 24/12/2011 in HINDI
कुछ तो कह कर जाती के
शायद बात बन जाती
गर मैं भी चुप ना रहता
तो  कहानी पूरी हो जाती
कुछ कहना था शायद उसको
हर बार ही लेकिन रुक जाती
मांगता रह हर पल मैं उसको
काश के मेरी बन जाती
लगता है कोई मजबूरी थी
यूँ रुसवा कर के ना जाती
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

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